शनिवार, 26 अप्रैल 2014

कैसे करें मंगल ग्रह शांति

कैसे करें मंगल ग्रह की शांति...
पं गिरीश दयाल चतुर्वेदी

Mangal


कई बार किसी समय-विशेष में कोई ग्रह अशुभ फल देता है, ऐसे में उसकी शांति आवश्यक होती है। गृह शांति के लिए कुछ शास्त्रीय उपाय प्रस्तुत हैं। इनमें से किसी एक को भी करने से अशुभ फलों में कमी आती है और शुभ फलों में वृद्धि होती है।

ग्रहों के मंत्र की जप संख्या, द्रव्य दान की सूची आदि सभी जानकारी एकसाथ दी जा रही है। मंत्र जप स्वयं करें या किसी कर्मनिष्ठ ब्राह्मण से कराएं। दान द्रव्य सूची में ‍दिए पदार्थों को दान करने के अतिरिक्त उसमें लिखे रत्न-उपरत्न के अभाव में जड़ी को विधिवत् स्वयं धारण करें, शांति होगी।

मंगल के लिए : समय- सूर्योदय से 48 मिनट तक।

का‍र्तिकेय या शिवजी की पूजा करें। का‍र्तिकेय या शिवजी के स्तोत्र का पाठ करें। मंगल के मंत्र का 10 हजार बार जाप करे

ज्योतिष शास्त्र में चन्द्र

जन्म कुण्डली में चन्द्रमा जिस राशी  में स्थित होता है, वह राशि चन्द्र राशि होती है. इसे जन्म राशि के नाम से भी जाना जाता है. वैदिक ज्योतिष  में सभी ग्रहों में सबसे अधिक महत्व चन्द्र को ही दिया गया है. इसे "नाम राशि" की संज्ञा भी दी जाती है. क्योकि ज्योतिष के अनुसार बालक का नाम रखने का आधार यही चन्द्र राशि होती है. जन्म के समय चन्द्र जिस नक्षत्र में स्थित होता है. उसके चरण के वर्ण से आरम्भ होने वाला नाम व्यक्ति का जन्म राशि नाम निर्धारित करता है.
 चन्द्र मन के कारक ग्रह माने गये है. इसलिये मन को नियन्त्रित करने का कार्य चन्द्र के द्वारा किया जाता है. मन चिन्तामुक्त हो तो व्यक्ति को हर स्थान पर सुख- शान्ति का अनुभव होता है. इसके विपरीत अगर मन दु:खी हों, तो उतम से उतम भोग- विलास की वस्तुओं भी आराम नहीं दे पाती. वैसे भी वैदिक ज्योतिष में [[चन्द्र राशि, चन्द्र नक्षत्र, चन्द्र स्थित भाव को शुरु से अन्य सभी योगों की तुलना में कुछ खास ही महत्व दिया जाता है
 चन्द्र राशि को इतना अधिक महत्व क्यों दिया गया है. यह जानने के लिये हमें प्राचीन काल की स्थिति को समझते हुए, वहां प्रवेश करना होगा. प्राचीन काल में बालक के जन्म समय की गणना करने संबन्धी उपकरण सरलता से उपलब्ध नहीं थें. इसलिये घंटों से अधिक दिवस को ही मुख्य माना जाता था. अब क्योकि चन्द्र एक राशि को लगभग सवा दो दिन में बदलता है. ऎसे में चन्द्र की महत्वता बढ गई. तथा इससे लग्न की महत्वता गौण हो गई. वैसे भी अन्य सभी ग्रहों की तुलना मे चन्द्र सबसे अधिक गतिशील ग्रह है. यह व्यक्ति के जीवन की घटनाओं को अत्यधिक प्रभावित करता है

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य


भारतीय ज्योतिष में सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है.सूर्य से सम्बन्धित नक्षत्र कृतिका उत्तराषाढ़ा और उत्तराफाल्गुनी हैं.यह भचक्र की पांचवीं राशि सिंह का स्वामी है.सूर्य पिता का प्रतिधिनित्व करता है,लकडी मिर्च घास हिरन शेर ऊन स्वर्ण आभूषण तांबा आदि का भी कारक है.मन्दिर सुन्दर महल जंगल  किला एवं नदी का किनारा इसका निवास स्थान है.शरीर में पेट आंख ह्रदय चेहरा का प्रतिधिनित्व करता है.और इस ग्रह से आंख सिर रक्तचाप गंजापन एवं बुखार संबन्धी बीमारी होती हैं.सूर्य की जाति क्षत्रिय है.शरीर की बनाव सूर्य के अनुसार मानी जाती है.हड्डियों का ढांचा सूर्य के क्षेत्र में आता है.सूर्य का अयन 6 माह का होता है.6 माह यह दक्षिणायन यानी भूमध्य रेखा के दक्षिण में मकर वृत पर रहता है,और 6 माह यह भूमध्य रेखा के उत्तर में कर्क वृत पर रहता है.इसका रंग केशरिया माना जाता है.धातु तांबा और रत्न माणिक उपरत्न लाडली है.यह पुरुष ग्रह है.इससे आयु की गणना 50 साल मानी जाती है.सूर्य अष्टम मृत्यु स्थान से सम्बन्धित होने पर मौत आग से मानी जाती है.सूर्य सप्तम द्रिष्टि से देखता है.सूर्य की दिशा पूर्व है.सबसे अधिक बली होने पर यह राजा का कारक माना जाता है.सूर्य के मित्र चन्द्र मंगल  और गुरु हैं.शत्रु शनि और शुक्र हैं.समान देखने वाला ग्रह बुध है.सूर्य की विंशोत्तरी दशा 6 साल की होती है.सूर्य गेंहू घी पत्थर दवा और माणिक्य पदार्थो पर अपना असर डालता है.पित्त रोग का कारण सूर्य ही है.और वनस्पति जगत में लम्बे पेड का कारक सूर्य है.मेष के 10 अंश पर उच्च और तुला के 10 अंश पर नीच माना जाता है.सूर्य का भचक्र के अनुसार मूल त्रिकोण सिंह पर 0 अंश से लेकर 10 अंश तक शक्तिशाली फ़लदायी होता है.सूर्य के देवता भगवान शिव हैं.सूर्य का मौसम गर्मी की ऋतु है.सूर्य के नक्षत्र कृतिका का फ़ारसी नाम सुरैया है.और इस नक्षत्र से शुरु होने वाले नाम ’अ’ ई उ ए अक्षरों से चालू होते हैं.इस नक्षत्र के तारों की संख्या अनेक है.इसका एक दिन में भोगने का समय एक घंटा है.