- सूर्य शांति के उपाय
- जप मंत्र :- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रों सः सूर्याय नमः ।
- जप संख्या :- 7000
- दान सामग्री :- गेहूं, लाल चंदन, गुड़, लाल वस्त्र, घृत, लाल वर्ण की गाय, स्वर्ण, माणिक्य, ताम्र पात्र, नारियल, लाल फल, मिष्ठान, दक्षिणा आदि ।
- उपाय :-
1. तांबे की अंगूठी में माणिक्य अथवा तैयार किया हुआ सूर्य यंत्र (ताम्रपत्र पर) धारण करें ।
2. खाना खाते समय सोने अथवा तांबे के चम्मच का प्रयोग करना तथा 11 रविवार तक सूर्य स्नान करना। (जब सूर्य, जन्म कुंडली अथवा वर्ष कुंडली में अशुभ हो)3. 108 रविवार तक ताम्र बर्तन में शुद्ध लाल चंदन मिलाकर सूर्य को अर्घ्य देकर "सूर्य कवचम्" का पाठ करें ।
4. 40 या 43 दिन तक चलते पानी में गुड़ अथवा तांबे के सिक्के बहाना शुभ होगा ।
5. सर्वप्रथम प्रातः काल उठकर स्नान उपरांत ताम्र कलश में जल, दूध, पुष्प, गंध, लाल चंदन आदि लेकर पूर्व दिशा में मुख करके गायत्री मंत्र तथा सूर्य अर्घ्य मंत्र के उच्चारण से अर्घ्य प्रदान करें।
6. रविवार को नमक से परहेज रखें तथा 11 रविवार पर्यंत केवल दही और चावल का सेवन करना चाहिए ।
चंद्रमा शांति के उपाय
जप मंत्र :- ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः ।जप संख्या :-11,000
दान सामग्री :- चावल, सफेद चंदन, शंख, कपूर, घृत, दही, चीनी, मिश्री, खीर, मोती, श्वेत वस्त्र, श्वेत पुष्प, श्वेत फल, चांदी, मिठाई और दक्षिणा आदि।
उपाय :-
1. चांदी के बर्तनों का प्रयोग करना एवं चारपाई के पायो में चांदी के कील ठुकवाना ।
2. सफेद मोतियों के माला अथवा चांदी की अंगूठी में मोती धारण करना।
3. शीशे के गिलास में दूध, पानी आदि पीने से परहेज रखना तथा चांदी के बर्तनों में दूध व पानी पीना शुभ होगा।
4. पानी में कच्चा दूध मिलाकर चंद्रमा का बीज मंत्र पढ़ते हुए पीपल को चढ़ाना।
5. लगातार 16 सोमवार व्रत रखकर सायं काल सफेद वस्तुओं का दान करना चाहिए तथा पांच छोटी कन्याओं को खीर सहित भोजन कराना चाहिए।
6. सोमवार को ही प्रातः काल स्नानादि करके ताम्र बर्तन में कच्ची लस्सी (जल तथा थोड़ा दूध) भगवान की मूर्ति या शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए।
7. चंद्र कवचम् पाठ करें और यंत्र भी धारण करें
8. द्वितीया चंद्र दर्शन करें।
मंगल शांति के उपाय
जप मंत्र :- ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमःजप संख्या :- 10000
दान सामग्री :- गेहूं, मसूर, रक्त वर्ण का बैल, घृत, गुड़, स्वर्ण, मूंगा, ताम्र बर्तन, कनेर के पुष्प, लाल चंदन, लाल वस्त्र, केसर, लाल फल, नारियल, मीठी चपाती, गुड़ से निर्मित रेवड़ियां, दक्षिणा आदिनोट :- मंगल का दान युवा ब्राम्हण को करना शुभ है ।
उपाय :- जब कुंडली में मंगल शुभ एवं योग कारक होता हुआ भी फल ना करता हो तो निम्न उपाय करें -
1. तांबे की अंगूठी में मूंगा धारण करना अथवा तांबे का कड़ा पहनना।
2. मंगलवार को घर में गुलाब का पौधा लगाना तथा 108 दिन तक रात को तांबे के बर्तन में पानी सिरहाने रखकर घर में लगाए हुए गुलाब के पौधे को वही डालना।
3. मंगलवार का व्रत रखकर 27 मंगल किसी दिव्यांग को मीठा विशेषकर गुड़ से निर्मित भोजन खिलाना।
4. नारियल को तिलक करके लाल कपड़े में लपेटकर लगातार तीन मंगलवार चलते पानी में बहाएं।
5. लाल रंग की गाय अथवा कुत्ते को रोटी खिलाएं।
6. मंगलवार का व्रत रखें।
7. विवाह हेतु मंगला गौरी का व्रत लगातार 7 मंगलवार रखना चाहिए।
बुध शांति के उपाय
जप मंत्र :- ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः।जप संख्या :- 9000
नोट :- बुध ग्रह अशुभ फली हो तो भगवान विष्णु का ध्यान करके शुक्ल पक्ष के बुधवार अथवा किसी शुभ मुहूर्त में आरंभ करके जप करना चाहिए।
दान सामग्री :- मूंग, हरे फल, चीनी, हरे पुष्प, हरी इलायची, कांस्य पत्र, पन्ना, सोना, हाथी दांत, षड् रसों से युक्त भोजन, हरी सब्जियां, हरा वस्त्र और दक्षिणा आदि।
उपाय :-
1. पन्ना धारण करना चाहिए।
2. हरे रंग के पर्दे तथा वस्त्रों का प्रयोग ।(बुध अशुभ होने पर हरा वस्त्र कदापि ना पहने।)
3. बुधवार को चांदी या कांसे के गोल टुकड़े को कपड़े में लपेट कर जेब में रखें या भुजाओं के साथ बांधें ।
नोट :- यदि बुध अशुभ हो तो मूंगी सावत के सात दाने, हरा पत्थर, कांसे का गोल टुकड़ा, हरे कपड़े में लपेटकर बुधवार को चलते पानी में बहाएं तथा बहाते समय बुध मंत्र का जाप करें।
4. हरे रंग के वस्त्र किसी हिजड़े को बुधवार के दिन देना चाहिए।
5. बुधवार के दिन 6 इलायची हरे रुमाल में लपेट कर अपने पास रख कर, इलायची तुलसी सेवन करें।
6. बुध कवचम् का पाठ करें तथा बोले यंत्र धारण कर पूजन करें।
बुधाष्टमी से बुधाष्टमी तक सविधि (जवारे) कलश स्थापन करें बाद में विसर्जन करें। दोनों पक्षों में बुधाष्टमी होना चाहिए।
गुरु शांति के उपाय
जप मंत्र :- ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।जप संख्या :- 19000
दान सामग्री :- पीले चावल, पुखराज, चने दाल, हल्दी, शहद, पीला कपड़ा, पीले फल (आम केला), कांस्य पात्र, घोड़ा, लवण, शक्कर, घृत, धर्म ग्रंथ, स्वर्ण, पीली मिठाई तथा दक्षिणा आदि।
उपाय :-
जन्म कुंडली में बृहस्पति शुभ व योग कारक होता हुआ भी शुभ फल प्रकट ना कर रहा हो तो निम्नलिखित उपाय करें ।
1. पुखराज धारण तथा 27 गुरुवार केसर का तिलक लगाना।
2. केसर की पुड़िया पीले वस्त्र में लपेट कर अपने पास रखना शुभ होगा।
गुरु के अशुभ प्रभाव के निवारण हेतु उपाय
1. बहते पानी में बादाम एवं नारियल पीले कपड़े में लपेटकर बहाएं।
2. पीपल वृक्ष को गुरुवार एवं शनिवार को गुरु का बीज मंत्र एवं गुरु गायत्री मंत्र पढ़ते हुए जल दें।
3. वृद्ध ब्राह्मण को यथाशक्ति पीली वस्तुएं जैसे चना-दाल, लड्डू, पीला वस्त्र, शहद आदि प्रदान करें।
शुक्र शांति के उपाय
जप मंत्र :- ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः ।
जप संख्या :- 16000
दान सामग्री :- चांदी, चावल, सुवर्ण, दूध, दही, मिश्री, श्वेत चंदन, श्वेत घोड़ा, वस्त्र, पुष्प, फल, सुगंधित तथा दक्षिणा आदि।
उपाय :- कुंडली में योगकारक शुक्र फलीभूत ना हो तो उपाय करें-
1. चांदी की कटोरी में सफेद चंदन, कपूर, सफेद पत्थर सोने वाले कमरे में रखें । चंदन अगरबत्ती जलाना शुभ होगा।
2. घर तुलसी गाय श्वेत पुष्प लगवाना क्रीम रंग के रेशमी कपड़े में चांदी के चौरस टुकड़े पर शुभ यंत्र खुदवाकर विधि पूर्वक अपने पास रखें।शुक्र अशुभ प्रभावी होने की स्थिति में उपाय
1. शुक्रवार को दुर्गा पूजन, 5 कन्या पूजन कर खीर आदि मीठा भोजन कराएं । गाय को घास प्रत्येक शुक्रवार को शक्कर चरी डालना।
2. सफेद रंग के पत्थर पर चंदन का तिलक लगाकर चलते पानी में बहा देना ।
3. चांदी पर शुक्र यंत्र को खुदवाकर रेशमी क्रीम रंग के वस्त्र में लपेटकर शुक्रवार को नीम के नीचे दबाना।
4. शुक्रवार का व्रत 5 शुक्रवार पांच कन्या पूजन विधि सहित श्वेत वस्तुएं भेंट करें।
शनि शांति के उपाय
जप मंत्र :- ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनिश्चराय नमःजप संख्या :- 23000
दान सामग्री :- नीलम, लोहा, तिल, उड़द (मांस) ,सरसों का तेल, काला वस्त्र, गाय, फल-फूल, जूता, कुल्थी, लोह पात्र, भैंस, कस्तूरी, सुवर्ण, नारियल ।
उपाय :- शनि शुभ होता हुआ भी शुभ फल प्रकट ना कर रहा हो तो निम्न उपाय शुभ होंगे।
1. स्वर्ण, मुद्रिका में धारण करें नीलम अथवा नाव की कील की अंगूठी अथवा काले घोड़े की नाल अंगूठी बनवा कर मध्यमा अंगुली में पहने।
2. घर में नीले रंग के पर्दे तथा चादर का प्रयोग तथा नीले वस्त्रों का प्रयोग करें।
जब कुंडली में शनि नीच अनिष्ट कर हो तो उपाय
1. शनिवार का व्रत करें तथा शनि स्त्रोत्र का पाठ करें।
2. स्टील की कटोरी में तेल का छाया पात्र करके तेल पांच शनिवार तक आक के पौधे पर अथवा शनि मंदिर में डालना शुभ होगा, तेल चढ़ाते समय बीज मंत्र पढ़ें।
राहु शांति के लिए उपाय
जप मंत्र :- ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।जप संख्या :- 18000
दान सामग्री :- सप्त धान्य (गेहूं उड़द मूंग चने जौं कंगनी और चावल), गोमेद, सीसा, काला घोड़ा, तिल, तेल, सोने या चांदी का सर्प, उड़द, खड्ग (तलवार), कवच, नीला वस्त्र, काला पुष्प, नारियल, दक्षिणा आदि।
उपाय :-
1. काले या नीले वस्त्रों से परहेज करें तथा चांदी की चेन आदि धारण करना शुभ होगा।
2. चपाती को खीर लगा कर कौओं अथवा काली गाय को खिलाएं।
3. काला तिल तथा कच्चा कोयला नीले रंग के ऊनी कपड़े में बांधकर शनिवार अथवा राहु के नक्षत्रों में (आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा) घर के आंगन में दबाना शुभ होगा।
4. कोयला, जवा, श्रीफल बहाएं।
केतु शांति के उपाय
जप मंत्र :- ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः।नोट :- जन्म अथवा वर्ष कुंडली में केतु अशुभ फल कारी होने पर यह मंत्र जाप शुभ मुहूर्त में करें।
जप संख्या :- 17000
दान सामग्री :- लहसुनिया, लोहा, बकरा, नारियल, सप्तधान्य (गेहूं उड़द मूंग चने जौं कंगनी और चावल), धूम्र (कत्थई) वस्त्र, कस्तूरी, लोहा, चाकू, कपिला, गाय, दक्षिणा सहित दान करें।
उपाय :-
1. केतु शांति हेतु श्री गणेश चतुर्थी व्रत रखें।
2. काले वस्त्र में तिल बांधकर बहाएं।
3. रंग बिरंगी (चितकबरी) गाय की सेवा करना एवं रंग-बिरंगे कुत्तों को दूध-ब्रेड डालना।





