यहाँ सर्व प्रथम सूर्यादि नवग्रहों से सम्बंधित वस्तुओं की चर्चा करेंगे क्योकिं
पीड़ा कारक ग्रहों के पदार्थों का दान करने से उनका अनिष्ट प्रभाव कम होता है तथा
पीड़ा का निवारण भी होता है| ग्रह से सम्बंधित वस्तुओं का दान सामर्थ्य, श्रद्धा और
विश्वास सहित करना चाहिए| दान करते समय मन में मलिनता या कष्ट की अनुभूंति होती हो
तो कदापि दान नहीं करना चाहिए| यदि दान देने की सामर्थ्य ही नहीं है, और दान देने
का प्रयास करेंगे तो पीड़ा घटने की अपेक्षा बढ़ेगी ही| सामर्थ्यानुसार कम दान भी
अधिक दान की तरह फलदायी है, यदि आपने दान श्रद्धा और विश्वास के साथ किया है|
सूर्य का दान
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माणिक्योधूमसवत्सधेनु:
कौसुम्भवस्त्रं गुड़हेम ताम्रम |
आरत्तकं चन्दनपंकजं च वदन्ति दानं हि प्रदीप्तधामने ||
माणिक्य, गेहूँ, बछड़े के साथ गौ, लाल कुसुम वर्ण
का वस्त्र, गुड़, स्वर्ण, तांबा, लाल चन्दन, लाल पुष्प आदि वस्तुओं का दान सूर्य
ग्रह की प्रसन्नता के लिए करना चाहिए|
कहने का तात्पर्य यही है कि
माणिक्य, गेहूँ, गुड़, तांबा, केसर, खस, मैनसिल स्वर्ण, घी, रक्तचन्दन, लालपुष्प,
लालकपड़ा, सवत्सा लाल गौ आदि वस्तुओं को रविवार को प्रातः दान करने से सूर्यपीड़ा का
शमन होता है| दान दस बजे से पूर्व किसी ब्राम्हण को आदर सहित पूर्ण श्रद्धा से
देना चाहिए|
चन्द्र का दान
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सदंशतात्रस्थिततंडुललांश्रच कर्पूरमुक्ता फलशु भ्रवस्त्रम् |
गाश्रचोपयुक्ता: वृषभं च रोप्यं चन्द्राय दद्यात् घृतपूर्णकुम्भं ||
बांस के पात्र में चावल, कपूर,
मोती, श्वेत वस्त्र, गौ या बैल, चांदी, घी से भरा घड़ा आदि पदार्थों का दान चन्द्र
ग्रह की प्रसन्नता के लिए करना चाहिए|
कहने का तात्पर्य यही है कि
सोमवार को संध्या समय किसी ब्राम्हण को बाँस के पात्र में चावल, कर्पूर, मोती,
श्वेत वस्त्र, सफेद गौ या बैल, चाँदी, घी, मिश्री, दही, शंख, श्वेत पुष्प आदि का
दान करने से चन्द्र-पीड़ा का शमन होता है| दान आदर सहित पूर्ण श्रद्धा के साथ देना
चाहिए|
मंगल का दान
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प्रवालगोधूममसूरिकाश्रच रक्तं वृषम् चापि गुडम् सुवर्णम् |
आरक्त्तवस्त्रं करवीरपुष्पं ताम्र हि भोषाय वदन्ति दानम् ||
मूंगा, गेहूँ, मसूर, लाल बैल, गुड़,
स्वर्ण, रक्त वस्त्र, लाल कनेर के पुष्प, तांबे के पात्र आदि पदार्थों का दान मंगल
ग्रह की प्रसन्नता के लिए करना चाहिए|
कहने का तात्पर्य यही है कि
मंगलवार को प्रातः ४८ मिनट तक किसी ब्राम्हण को मूंगा, गेहूं, मसूर, लालबैल, गुड़,
स्वर्ण, लाल कपड़ा, लालफूल-तांबादि का दान करने से मंगल-पीड़ा का शमन होता है| दान
सामर्थ्य और आदर सहित पूर्ण श्रद्धा के साथ देना चाहिए|
बुध का दान
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चैलं च नीलं कलधौतकांस्ये प्रवाल गावौ शुभकालपुष्पम् |
दासी च हस्ती च सदा प्रदेय वदन्ति दानं विधुनन्दनाय ||
नीले रंग का (हरा कपड़ा ) सुवर्ण या चाँदी, कांस्य पात्र, मूंगा, गाय, नीले
पुष्प, दासी, हाथी आदि पदार्थों का दान बुध की प्रसन्नता के लिए करना चाहिए|
कहने का तात्पर्य यही है की
बुधवार को सूर्योदय से २ घंटे तक या संध्या समय किसी ब्राम्हण दीन-हीन गरीब को
स्वर्ण, मूंगा, हांथी दांत, हरावस्त्र, शस्त्र, घृत, शक्कर, कर्पूर, पीले पुष्प,
पन्ना, फल, सामर्थ्य के अनुसार, दक्षिणा आदि का दान करने से बुध-पीड़ा का शमन होता
है| दान सामर्थ्य और आदर सहित पूर्ण श्रद्धा के साथ देना चाहिए|
गुरु का दान
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शर्करा च रजनी तुरंगम: पीतधान्यमपि पीतमम्बरम् |
पुष्परागलबणादिकांचनं प्रीतये सुरगुरो: प्रदीयताम् ||
शक्कर, हल्दी, घोड़ा, पीला धान्य, पीला वस्त्र, पुखराज, नमक, स्वर्ण आदि
पदार्थों का दान गुरु ग्रह की प्रसन्नता के लिए करना चाहिए|
कहने का तात्पर्य यही है कि गुरुवार
की संध्या में किसी ब्राम्हण या दीन-हीन गरीब को स्वर्ण, काँस्य, पीतवस्त्र, घृत,
शक्कर, घोड़ा, चने की दाल, हल्दी, पीले फूल, लवण, पुखराज, पुस्तक व सामर्थ्य के
अनुसार दक्षिणा आदि का दान करने से गुरु-पीड़ा का शमन होता है| दान सामर्थ्य और आदर
सहित पूर्ण श्रद्धा के साथ देना चाहिए|
शुक्र का दान
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चित्राम्बरं शुभ्रतरम् तुरंगं धेनुं सवत्सां रजतं सुवर्णम् |
सतण्डुलम् चैव सुगंधयुक्तं वदन्ति दानं भृगुनन्दनाय ||
छींट के वस्त्र, श्वेत अश्व, बछड़े सहित गौ,
चांदी, सोना, चावल और सुगन्धित पदार्थों का दान शुक्र ग्रह की प्रसन्नता के लिए
करना चाहिए|
कहने का तात्पर्य यही है कि
शुक्रवार के दिन सूर्योदय के बाद किसी ब्राम्हण या दीन-हीन गरीब को छींट के
वस्त्र, श्वेत अश्व, सवत्सा गौ, चाँदी, चावल, सुगन्धित पदार्थ, दूध, घी, खीर या
खीर का सामान आदि का दान करने से शुक्र-पीड़ा का शमन होता है| दान सामर्थ्य और आदर
सहित पूर्ण श्रद्धा के साथ देना चाहिए|
शनि का दान
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मापाश्रच तेलम् विमलेन्द्रनीलम् तिलं कुलत्थी महिषी च लोहम् |
सदक्षिणं वस्त्रयुतं वदन्ति सभक्तिदानं रविनन्दनाय ||
काला उड़द, तेल, नीलम, काला
तिल, कुलथी, भैस, लोहा, दक्षिणा, काला कपड़ा आदि पदार्थों का दान शनि ग्रह की
प्रसन्नता के लिए करना चाहिए|
कहने का तात्पर्य यही है कि
शनिवार के दिन मध्यान्ह या सायं काल के समय किसी ब्राम्हण या दीन-हीन गरीब को काले
उड़द, तेल, नीलम, तिल, कुलथी, भैंस, लोहा, श्यामवस्त्र व सामर्थ्य के अनुसार
दक्षिणा आदि का दान देने से शनि-पीड़ा का शमन होता है| दान सामर्थ्य और आदर सहित
पूर्ण श्रद्धा के साथ देना चाहिए|
राहु का दान
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गोधूमरत्नं च तुरगंमं च सुनीलचैलानी च कम्बलम् च |
तिलं च तैलं खलु होमिश्रम् स्वर्भानवे दानमिदं वदन्ति ||
गेहूँ, रत्न, घोड़ा, नीले वस्त्र, कम्बल, तिल, तेल, लोहा, अभ्रक आदि पदार्थों
का दान राहु ग्रह की प्रसन्नता के लिए करना चाहिए|
कहने का तात्पर्य यही है कि
बुधवार को संध्या या रात्रि समय गोमेद, गेहूँ, अश्व, नीला/भूरा वस्त्र, शीशा आदि
का दान देने से राहु-पीड़ा का शमन होता है| दान सामर्थ्य और आदर सहित पूर्ण श्रद्धा
के साथ देना चाहिए|
| केतु का दान |
र्वदूर्यरत्नं सतिलं च तैलं, सुकम्बलं चासित पुष्पकं च |
वस्त्रं च केतो परितोषहेतोरुदीरितं दानमिदं मुनीन्द्र: ||
वैदूर्यमणि लहसुनिया, तिल, तेल, कम्बल, काले पुष्प, काले वस्त्र आदि पदार्थों
का दान केतु ग्रह की प्रसन्नता के लिए करना चाहिए|
कहने का तात्पर्य यही है कि
बुधवार की संध्या (रात्रि समय) लहसुनिया तिल, तेल, कम्बल, कालेफूल, कालावस्त्र,
कस्तूरी आदि का दान देने से केतु-पीड़ा का शमन होता है| दान सामर्थ्य और आदर सहित
पूर्ण श्रद्धा के साथ देना चाहिए|
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