ॐ गायत्री मंत्र के अद्भुत
प्रयोग
भगवद्गीता प्रमाणिक
धार्मिक ग्रन्थ है | उसके अंतर्गत भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि “प्रज्ञानां जप
यज्ञानां” मैं समस्त प्रकार के यज्ञों
में जप यज्ञ हूँ क्योंकि यह सर्वश्रेष्ठ है | जप यज्ञ सर्वश्रेष्ठ है | यह
बात समस्त गायत्री मन्त्रों के सन्दर्भ में ही कही गयी है क्योंकि गायत्री को “मन्त्रों
का राजा” कहा गया है | गायत्री ही सबसे बड़ी शक्ति है | उसका सीधा सम्बन्ध इस
प्रकार है –
श्लोक – “बुद्धिर्यस्य बलंतस्य निर्बुद्धस्तु कुतोबलम |
वने सिंह मदोन्यन्तः
शशरेणनिपातितः||”
अर्थ – बुद्धि ही सबसे बड़ा फल है
और गायत्री में सूर्य भगवान से बुद्धि को सन्मार्ग पर चलाने कि प्रेरणा के लिए
निवेदन किया गया है | गायत्री के विषय में कुछ ज्ञातव्य इस प्रकार है –
श्लोक – शाप युक्तासु गायत्री सफला न कदाचन |
शापादुतिराता सातु मुक्ति
भुक्ति फलप्रदः ||
अर्थ – शाप युक्त गायत्री सफल नहीं
होती तथा शाप मुक्त गायत्री काम्य वस्तुओं के अतिरिक्त मुक्ति प्रदान कार सकती है
| गायत्री जाप से पूर्व शाप विमोचन इस प्रकार करना चाहिए –
ॐ वेदान्तनाथाय विद्महे हिरण्यगर्भाय धीमहि तन्नो बुध्मः प्रचोदयातदेवी
गायत्री त्वं बुध्य शाप विमुका भव |
यह मंत्र से पहले
अनिवार्य है |
सूर्योदय के समय गायत्री
जाप करने से आयु आरोग्य ऐश्वर्य और धन निश्चित ही प्राप्त होता है एक बात और विशेष
है कि कलयुग में पृथ्वी पर सर्वत्र इंद्र का राज्य है किसी स्थान पर किये गए जप का
प्रभाव इंद्र को ही प्राप्त होता है | जप स्थान पर आसन के नीचे कि मिट्टी से मस्तक
पर तिलक करने से फल जपकर्ता को प्राप्त होता है | फिर हमें कृष्णार्पण करने से फल
और लाभ निश्चय ही प्राप्त होता है |
“कलौ संख्यौ चतुर्गुणाः” मंत्र के अक्षरों का
चार गुना जाप करने से लाभ होता है | यह कलयुग का प्रमाण है | गायत्री का तीन लाख
जाप करना तो अनिवार्य है | हवन की कुछ विशिष्ट बातें इस प्रकार है –
1.
शमी, बिल्व अथवा आक की
समिधा और घृत से हवन करने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है |
2.
बिल्व पत्र को घृत में
डुबोकर हवन करने से मनुष्य महान धनवान होता है |
3.
गूगलकी गोलियों से हवन करने
से भाग्य वृद्धि होती है |
4.
काम्य वस्तुओं की प्राप्ति
हेतु पलाश (ढाक) के पुष्पों द्वारा हवन करना लाभप्रद होता है |
5.
तिल, जवा और घृत से हवन
करने से श्रेष्ठ पद कि प्राप्ति होती है |
6.
अमृता (गिलोय) के टुकड़ों का
घृत या दुग्ध के साथ हवन करने से अकाल मृत्यु का निवारण होता है |
7.
जूही के पुष्पों से हवन
करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है |
8.
पीपल, गूलर या बरगद किसी की
भी समिधा से हवन करने से ग्रह क्लेश शांत होतें है |
9.
विल्व पात्र (पुष्प, फल या
जड़) किसी से भी हवन करने से लक्ष्मी कि प्राप्ति होती है |
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